Home बड़ी खबरेnews मटन-चिकन से भी महंगी हुई सब्जियां, बिगड़ा बजट, 120 रुपए किलो हुई..

मटन-चिकन से भी महंगी हुई सब्जियां, बिगड़ा बजट, 120 रुपए किलो हुई..

Vegetables are costlier than mutton and chicken, budget is affected, they are priced at Rs 120 per kg.

त्यौहारों के मौसम के चलते हरी सब्जियों के आसमान छूते दामों से हर वर्ग परेशान है। चिकन मीट के दाम सब्जियों के दाम से ज्यादा होने के कारण लोग हरी सब्जियां खरीदने से भी बच रहे हैं। इस बीच, महिलाओं के किचन का बजट भी बिगड़ गया है। दिहाड़ी मजदूर भी हरी सब्जियां नहीं खरीद पा रहे हैं।

 

गौरतलब है कि इस समय हरा धनिया 600 रुपए प्रति किलो, पत्ता गोभी 100-120 रुपए, मटर 200 रुपए, बैंगन 50 रुपए, मूली 50 रुपए, कद्दू 50 रुपए, पालक 100 रुपए, सरसों का साग 50 रुपए प्रति किलो और मेथी 80 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। जबकि टमाटर भी 50 रुपए प्रति किलो के आसपास बिक रहा है। अगर मीट की बात करें तो वह भी करीब 150 रुपए में बिक रहा है, जबकि सब्जियां और भी ऊंचे रेट पर बिक रही हैं।

 

शहर में सब्जी बेचने वालों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सर्दियों की सब्जियां शुरुआत में महंगी जरूर होती हैं, लेकिन होली के दिनों इनके दाम जरूर कम होंगे। उन्होंने कहा कि सब्जियों के ऊंचे दामों की वजह से लोग बहुत कम सब्जियां खरीद रहे हैं। एक किलो सब्जी खरीदने के बजाय लोग 500 किलोग्राम सब्जियां भी खरीद रहे हैं। जबकि इस समय सिर्फ पालक, प्याज और आलू ही सस्ते दिख रहे हैं। जबकि दूसरी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। जब इस बारे में महिलाओं तथा लोगों ने कहा कि सब्जियों के आसमान छूते दामों ने आम लोगों के किचन का बजट बिगाड़ दिया है। जो गरीब परिवार रोज मजदूरी करके कमाते हैं, उनकी थाली से भी अब सब्जियां गायब होती दिख रही हैं।

 

सब्जियों के बढ़े दामों ने खासकर गरीबों के खाने का स्वाद बिगाड़ दिया है। जिस तरह से सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, उससे रोज कमाने-खाने वालों के लिए सब्जियां खरीदना पहुंच से बाहर हो गया है। उन्होंने सरकार से अपील की कि सब्जियों की लगातार बढ़ती कीमतों को कंट्रोल किया जाए और जनता को राहत दी जाए।

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