Home बड़ी खबरेnews केंद्र से आए 50 करोड़, खर्च हो गए 155 करोड़, इस हैल्थ स्कीम में बकाया हो गया 240 करोड़

केंद्र से आए 50 करोड़, खर्च हो गए 155 करोड़, इस हैल्थ स्कीम में बकाया हो गया 240 करोड़

50 crore rupees came from the Centre, 155 crore rupees were spent, leaving a balance of 240 crore rupees in this health scheme.

भारत सरकार की फ्लैगशिप योजना आयुष्मान भारत या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का फंडिंग फार्मूला अन्य राज्यों की तरह हिमाचल पर भी भारी पड़ रहा है। प्रति व्यक्ति 1100 रुपए की दर से भुगतान के केंद्रीय फार्मूले के कारण इस योजना में हो रहे खर्च का भुगतान नहीं हो रहा। कुल लंबित भुगतान हिमाचल में अब 240 करोड़ हो गया है। यदि पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 की बातर करें तो केंद्र सरकार ने इसमें 50 करोड़ दिये और स्टेट शेयर के 5 करोड़ मिलाकर कुल बजट 55 करोड़ हुआ, लेकिन 31 मार्च तक कुल खर्च 155 करोड़ इस योजना में हो गया है।

इससे पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2024-25 में भी केंद्र सरकार से ज्यादा खर्चा राज्य सरकार का हो गया था। इसके बाद वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने अपने बजट से पैसे देना बंद कर दिया। यही वजह है कि पेंडेंसी लगातार बढ़ रही है। हिमकेयर में बेशक राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों को बाहर कर दिया है, लेकिन आयुष्मान मेें इंपैनल निजी अस्पताल अब भी इलाज दे रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना 23 सितंबर, 2018 को शुरू हुई थी। तब 4.78 लाख परिवारों को इस योजना के तहत पात्र घोषित किया गया था। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना 90-10 के खर्चे में चलती है, लेकिन यह फार्मूला वास्तविक खर्च पर नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति 1100 रुपये के आधार पर पूर्व निर्धारित लागत से है। भारत सरकार ने बाद में 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को भी बिना औपचारिकता इस स्कीम में ले लिया।

 

राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना का क्रेडिट लेने के बावजूद राज्य को एक्चुअल खर्च का भुगतान नहीं हो रहा है। चार महीने पहले तक राज्य में अब तक 3.71 लाख लोगों को फ्री इलाज दिया जा चुका है, जिस पर 485 करोड़ का खर्चा हुआ है। लेकिन इसमें से केंद्र सरकार ने सिर्फ 260 करोड़ का भुगतान किया, जबकि राज्य सरकार को करीब 150 करोड़ खर्च करना पड़ा है। यदि सिर्फ वर्ष 2024-25 की बात करें तो केंद्र सरकार ने करीब 50 करोड़ जारी किए, जबकि राज्य सरकार को इस स्कीम पर 57 करोड़ रुपए लगाने पड़े। पिछले भुगतान के लंबित होते देख वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने इस खर्च को नियंत्रित करते हुए हाथ पीछे खींच लिए थे।

You may also like