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जेड स्कोर फॉर्मूले से बनेगी मल्टी शिफ्ट CBT मेरिट

Multi-shift CBT merit will be prepared using the Z-score formula.

हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग भर्ती प्रक्रियाओं को सरल और पूर्ण रूप से पारदर्शी बनाने के लिए समय-समय पर नए प्रयोग कर रहा है, ताकि भंग हो चुके पूर्व कर्मचारी चयन आयोग से जो भरोसा प्रदेश की जनता और बेरोजगारों का टूटा था, उसे दोबारा बनाया जा सके। इसी कड़ी में आयोग ने अब भर्ती परीक्षाओं के लिए करवाए जाने वाले कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) के परिणाम की मेरिट के लिए जेड स्कोर फॉर्मूले तय करने का निर्णय लिया है। आयोग इस फॉर्मूले को टीजीटी भर्ती में लागू करने जा रहा है। उसके बाद जेबीटी भर्ती परीक्षा में भी यह लागू होगा। दरअसल, यह फॉर्मूला उन भर्ती परीक्षाओं में लागू होता है, जो मल्टी शिफ्ट होती है। उनकी मेरिट बनाने के लिए जो एवरेज स्कोर निकाला जाता है, उसमें यह फॉर्मूला लगाया जाता है। बता दें कि नीट, जेईई, रेलवे और बैंकिंग जैसी मल्टी शिफ्ट भर्तियों में मेरिट के लिए जेड स्कोर फॉर्मूला इस्तेमाल किया जाता है।

 

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन भर्ती विज्ञापनों की परीक्षा मल्टीपल शिफ्ट में होगी, उनमें उम्मीदवारों के स्कोर को जेड स्कोर फॉर्मूले (मीन एंड स्टैंडर्ड डेविएशन मेथ्ड) से नॉर्मलाइजेशन किया जाएगा। 15, 16 और 17 दिसंबर व 25, 26 व 27 दिसंबर को होने वाली नॉन मेडिकल टीजीटी की मल्टी शिफ्ट परीक्षा की मेरिट के लिए आयोग इस फॉर्मूले को लागू करने जा रहा है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग पहली बार जेड स्कोर फॉर्मूले को लागू कर रहा है।

 

परीक्षा की हर शिफ्ट में बराबर होंगे अभ्यर्थी

 

जेड स्कोर फॉर्मूले के लिए यह भी जरूरी होता है कि हर सेंटर में हर शिफ्ट में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की संख्या बराबर हो। उसमें हर कैटेगिरी के अभ्यर्थियों की औसत समान होनी चाहिए। ऐसा नहीं कि एक शिफ्ट में किसी विशेष कैटेगिरी के अभ्यर्थी बिठा दिए जाएं। हर शिफ्ट के लिए सीबीटी पर अलग-अलग प्रश्नपत्रों का प्रावधान रहता है। फिर जो मेरिट आती है, उसकी एक औसत वेल्यू डालकर मेरिट बनाई जाती है।

 

यह होता है जेड स्कोर फॉर्मूला

 

कोर्ट से सत्यापित जेड स्कोर फॉर्मूले को ज्वाइंट मेरिट बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हर उम्मीदवार का रॉ स्कोर एक विशेष फॉर्मूले से बदला जाता है, जिस शिफ्ट की औसत परफॉर्मेंस सबसे अधिक होती है, उसे नॉर्मलाइजेशन का बेस माना जाएगा। अन्य शिफ्टों की स्टैंडर्ड डिविएशन को उसी स्केल पर समायोजित किया जाता है। इसके बाद हर उम्मीदवार को नॉर्मलाइज्ड स्कोर दिया जाता है।

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