Home बड़ी खबरेnews अंडे खाने के शौकीन पढ़ लें ये अहम खबर! हैरान करने वाला मामला आया सामने

अंडे खाने के शौकीन पढ़ लें ये अहम खबर! हैरान करने वाला मामला आया सामने

Egg lovers should read this important news! A shocking case has come to light.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में लाखों नकली रंगे हुए अंडों की बरामदगी ने पूरे उत्तर भारत में बिक रहे कथित देसी अंडों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद पंजाब में भी यही आशंका जताई जा रही है कि कहीं यहां सफेद फार्मिंग अंडों को रंग लगाकर ‘देसी’ बताकर तो नहीं बेचा जा रहा। मुरादाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग ने छापा मारकर 4.53 लाख से अधिक रंगे हुए अंडे और 35,640 सफेद अंडे जब्त किए थे, जिन पर आर्टिफिशियल केमिकल रंग चढ़ाकर उन्हें देसी अंडे जैसा दिखाने का प्रयास किया गया। विभाग ने इन्हें सेहत के लिए खतरनाक बताते हुए गोदाम को सील कर दिया।

 

इस बड़े खुलासे के बाद पंजाब में भी कई उपभोक्ताओं के मन में शंकाएं बढ़ी हैं। कुछ दुकानों पर दिखाई देने वाले कुछ अंडों का रंग, सतह और मोटाई देखकर लोगों में यह अंदेशा उभर रहा है कि इनमें मिलावट या रंगाई हो सकती है। आम तौर पर देसी अंडों की सतह हल्की खुरदरी और प्राकृतिक मानी जाती है, जबकि कुछ अंडों पर दिखाई देने वाली अत्यधिक चमक या असमान रंग लोगों को संदेह में डाल देता है।

 

कई जगह ऐसे अंडे भी देखने को मिले हैं जिनका छिलका दबाने पर जरूरत से अधिक कड़ा या सिंथेटिक जैसा महसूस होने की बातें उपभोक्ता अपने स्तर पर बताते रहे हैं। इन बातों के चलते यह शक और गहरा हो रहा है कि कहीं बाजारों में रंगे हुए फार्मिंग अंडों को ‘देसी’ के नाम पर बेचा तो नहीं जा रहा। सर्दियों के मौसम में अंडों की बढ़ती मांग को देखते हुए लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों की संभावना भी बढ़ जाती है। इसी कारण पंजाब के बाजारों में नियमित जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

 

मुरादाबाद की घटना ने यह संकेत दिया है कि यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि उत्तर भारत की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी व्यापक चिंता बन सकता है। अब नजरें इस पर हैं कि पंजाब में संबंधित विभाग इस संभावित गड़बड़ी को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

 

पंजाब में संदिग्ध ‘देसी अंडों’ की जांच क्यों जरूरी

पंजाब के कई इलाकों में सड़कों के किनारे बड़ी मात्रा में कथित ‘देसी अंडे’ खुले में बेचे जा रहे हैं। विक्रेता दावा करते हैं कि पास ही देसी मुर्गियों का फार्म है और अंडे वहीं से सीधे लाए जाते हैं, जिस पर विश्वास करके कई वाहन चालक एक बार में कई ट्रे खरीद लेते हैं। लेकिन असली देसी अंडे तोड़ने पर उनकी जर्दी स्वाभाविक गाढ़े पीले रंग की होती है, जबकि सड़क किनारे बिकने वाले इन अंडों की जर्दी अक्सर चटक संतरी रंग की पाई गई है, और कई बार उनकी गंध भी सामान्य से अलग महसूस होती है। रंग, गंध और बनावट में यह असमानता मिलावट या रंगाई की आशंका को मजबूत करती है।

 

मुरादाबाद में लाखों रंगे अंडे पकड़े जाने के बाद अब पंजाब में भी खाद्य सुरक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि संदिग्ध अंडों की तत्काल सैंपलिंग, जांच, और लैब टेस्टिंग की जाए। साथ ही बाजारों, सड़क किनारे दुकानों, पोल्ट्री फार्मों, और सप्लाई चेन पर कड़ी निगरानी रखी जाए, ताकि रंगे हुए फार्मिंग अंडों को ‘देसी’ बताकर बेचे जाने की संभावनाओं पर समय रहते रोक लग सके।

 

नकली रंगों में पाए जाने वाले हानिकारक तत्व और इनके गंभीर दुष्परिणाम

मुरादाबाद में पकड़े गए लाखों रंगे हुए अंडों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंडों पर लगाए जाने वाले कृत्रिम रंग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इन अंडों पर ऐसे रसायन इस्तेमाल होने की आशंका है, जिनका सेवन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। सबसे खतरनाक तत्वों में फॉर्मल्डिहाइड शामिल है, जो लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचाकर कोशिकाओं पर विषैला असर डाल सकता है। पेट्रोलियम-बेस्ड कोलोरेंट हार्मोनल संतुलन को बाधित करता है और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन स्तर घटा सकता है।

 

इसके अलावा, रंगाई में उपयोग होने वाले प्लास्टिसाइजर प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, जबकि विभिन्न कृत्रिम डाई त्वचा एलर्जी, पाचन तंत्र की खराबी, और बच्चों में इम्यूनिटी कम होने जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये रंग खाद्य उपयोग के लिए अनुमत नहीं हैं और ऐसे अंडों का नियमित सेवन दीर्घकालिक बीमारियों के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। इसलिए संदिग्ध रंग वाले अंडों की पहचान, जांच और निगरानी बेहद आवश्यक है।

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