Home बड़ी खबरेnews मकर संक्रांति और एकादशी का दुर्लभ संयोग, खिचड़ी बनाना रहेगा वर्जित, जानें ऐसा क्यों बोले पंडित

मकर संक्रांति और एकादशी का दुर्लभ संयोग, खिचड़ी बनाना रहेगा वर्जित, जानें ऐसा क्यों बोले पंडित

Rare coincidence of Makar Sankranti and Ekadashi, making Khichdi will be prohibited, know why the Pandit said so

इस वर्ष 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जवाली के ज्योतिषी पंडित विपन शर्मा ने बताया कि यह दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं और पौष मास की एकादशी भी इसी दिन है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि खिचड़ी खाई जाए या व्रत रखा जाए। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि इस दिन एकादशी का नियम सर्वोपरि है। यह अवसर केवल पर्व नहीं, बल्कि धर्म, संयम और पुण्य कर्म का संतुलन सीखने का भी समय है। इस दिन व्रत, पूजा और दान से अधिक पुण्य मिलता है।

एकादशी व्रत और संक्रांति का संगम

एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन अनाज खाना वर्जित है। खासकर चावल का सेवन, छूना या दान करना भी नहीं करना चाहिए। जब मकर संक्रांति और एकादशी एक ही दिन पड़ती हैं, तो इस दिन एकादशी का नियम सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए खिचड़ी या अन्य अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। यह संयम भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक अनुशासन सिखाता है। इस तरह, व्रत रखने वाले लोग संक्रांति का पुण्य और एकादशी के नियम दोनों का लाभ पा सकते हैं।

 

तिल और गुड़ दान का विशेष महत्व

ज्योतिषी पंडित विपन शर्मा ने बताया कि इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन एकादशी होने के कारण सावधानी आवश्यक है। इस दिन चावल या खिचड़ी का दान वर्जित है। इसके स्थान पर तिल, गुड़, गच्चक, फल, दूध, घी, वस्त्र, कंबल या तिल से बनी खिचड़ी का दान किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार तिल का दान विशेष पुण्य देता है और पितृ दोष तथा ग्रह दोष को शांत करने में सहायक होता है। उन्होंने कहा कि 15जनवरी को खिचड़ी बनाई जा सकती है।

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